लखीसराय बाईपास पुल बंद, शहर में जाम से हाहाकार

लखीसरायः लाइफलाइन कहे जाने वाला बाईपास पुल बंद होने से शहर का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

लखीसराय बाईपास पुल बंद, शहर में जाम से हाहाकार
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लखीसरायः लाइफलाइन कहे जाने वाला बाईपास पुल बंद होने से शहर का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। 146 करोड़ की लागत से बना यह पुल महज 6 साल में ही दम तोड़ गया। अब भारी वाहन शहर के मुख्य बाजार से गुजर रहे हैं, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।

स्कूली बच्चे और दुकानदार सबसे ज्यादा परेशान हैं। पुल पर भारी वाहनों पर रोक लगाने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। बाईपास पुल बंद होने के बाद से एनएच-80 का पूरा ट्रैफिक शहर से गुजर रहा है।

 यह बाईपास पुल 2020 में 146 करोड़ की लागत से बना था। इसे लखीसराय की लाइफलाइन कहा जाता था। लेकिन 6 साल में ही पुल क्षतिग्रस्त हो गया। जिला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से इस पर भारी वाहनों का परिचालन रोक दिया है।

अब सवाल उठ रहा है कि इतनी जल्दी पुल कैसे क्षतिग्रस्त हो गया। आरटीआई कार्यकर्ता टुनटुन सिंह ने इस मुद्दे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। "146 करोड़ का पुल 6 साल में दम तोड़ दे, ये भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है।

अगर ओवरलोडिंग से टूटा है तो विद्यापीठ, बलगुदर, दरियापुर के पुल क्यों नहीं टूटे? मैं शपथ लेकर कहता हूं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के रीजन में लखीसराय में बने पुलों में खामी निकलेगी। सरकार मुझे जेल में रखे, मैं तैयार हूं।"वहीं जेडीयू नेता नंदू मुखिया ने ओवरलोडिंग को पुल टूटने का कारण बताया है।

"पुल बना है तो टूटेगा। क्षमता से अधिक ओवरलोड वाहन चले तो कोई भी पुल क्षतिग्रस्त होगा। इसमें ललन बाबू ने तो पुल बनाया नहीं। विभाग और प्रशासन दोषी है जो ओवरलोडिंग नहीं रोक पाया।" स्थानीय लोगों की मांग है कि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था हो।

डीएम ने बताया कि पुल की मरम्मत के लिए एनएचएआई को पत्र लिखा गया है। साथ ही शहर में नो-एंट्री का समय बढ़ाया जाएगा। विपक्ष ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

146 करोड़ का पुल 6 साल में टूटना वाकई जांच का विषय है। सरकार को पारदर्शी जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि जनता को राहत मिले। लखीसराय से एनबीसी 24 के लिए संतोष कुमार गुप्ता की रिपोर्ट।